Friday, May 6, 2011

कलमाड़ी चालीसा 
श्री गुरू भ्रष्ट रज ,निज मन मुकुर सिधार 
बरनौं राजनीती विमल जस जो दायक फल चार
भ्रष्टहीन तनु जनि के सुमिरौं भ्रष्ट कुमार 
भ्रष्ट बुद्धि-ज्ञान देहूं मोहि, हरहूँ क्लेश विकार 

जय कलमाड़ी भ्रष्ट गुण सागर
तू भ्रष्टटीश(भ्रष्टाचारियों का स्वामी) तिहूँ लोक उजागर
कांग्रेस दूत अतुलित चलबाजा
दुनिया में बजाया भ्रष्टाचार का बाजा
महाभ्रष्ट चालबाज़ भ्रष्टंगी
सुमति निवारो कुमति के संगी
कला वरन विराज कुवेशा 
मन काला अच्छाई को न लेशा 
हाथे कामन वेल्थ खेल का झंडा विराजा
घर से बैंक तक काला धन साजा
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जय जय जय कलमाड़ी गोसाईं 
कृपा करहूँ इस देश की नाईं
जो शत बार पथ कराइ कोई
होही महाभ्रष्ट जाई जेल में सोई