अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो अनशन किया,उसमें लगभग पूरा देश उनके साथ उठ खड़ा हुआ,क्योंकि यह लड़ाई केवल अन्ना की नही थी.भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरा देश खड़ा होना चाहता है.मगर सवाल वही कि पहले आवाज़ कौन उठाएगा?बिल्ली के गले में घंटी कौन बंधेगा?जैसे ही किसी ने आवाज उठाई लोगों को उसमें अपनी आवाज़ दिखाई दी,बस लोगों ने बिना सोचे - समझे अन्ना के सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया.मीडिया ने इसे खूब प्रोजेक्ट किया?मगर इस आन्दोलन की कुछ बुनियादी कमजोरियां अब दिखने लगी हैं और इसके पीछे छिपे मीडिया एवं सत्ता का खेल स्पष्ट रूप से सामने आने लगा है.अमर सिंह वाले सीडी विवाद के बाद दोनों भूषण को जन लोकपाल कमिटी से बिना किसी सफाई के इस्तीफ़ा दे देना चाहिए .कोरोड़ो की सम्पति हथियाने में कमोबेस करप्शन तो इनलोगों ने किया है.इन लोगों का कमेटी में रहने का कोई नैतिक आधार नहीं है. भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी कमेटी में करोड़पत्ति रहें तो उनसे निष्पक्षता की उम्मीद करना बेकार है.उसमे ऐसे लोगो को रखा जाये जिनका जीवन इतिहास पाक-साफ एवं इमानदार रहा हो.मेधा पाटेकर ,अरुंधती राय, बाबा रामदेव, ए. पि. जे. अबदुलकलाम, नितीश कुमार, बुद्धदेव भट्टाचार्य,हालत यह कि इस देश में दस नाम खोजने में आंधी आ रहा है.कम-से-कम पहले चार नाम पर तो अधिकांश सहमत होंगे ही.बाकि जब इया मौजूदा लोकतंत्र में भ्रष्टाचार के शिवाय कुछ नहीं बचा है तन इस भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार बाबा रामदेव का फंदा आजमाना ही चाहिए.इसमें विवाद हो सकता है मगर एकबार आजमाकर देखा जाए .न कुछ से कुछ भला.बुद्धिजीवियों की बात समझ में नहीं आती है . एक तो ये कभी आवाज़ नहीं उठाते ,आवाज़ उठाते इनकी नानी मारती है ,आन्दोलन को तो ये बेवकूफी समझतें हैं,और जब कोई आवाज़ उठता भी है इअसमे पचासों खामियां निकलते हैं,स्वार्थ ढूंढ़ निकलते हैं ,मगर किसी भी समस्या का इनके पास कोई समाधान नहीं है.सबसे नकारे यही हैं.इनकी राय सुनी जय,मगर इनके नकारे से आंदोलनकारियो को घबडाना नही चाहिए.कोई भी मुहीम पूरी तरह पाक-साफ या बिना खामी की नहीं हो सकती .आन्दोलन शुरू हो धीरे-धीरे उसकी साडी खामियां दूर कर ली जाएँगी.मुहीम तो चले पहले.मुहीम मरण स्वार्थी लोग भी आएंगे ,संभव है कि वही आगे आजायें,मगर उनको पछाड़ते हुए उसमे मौजूद सही लोग आन्दोलन को सफलता कि ओर ले जा सकते हैं.मुहीम चले,बुद्धिजीवी उसकी कामिओ पर नजर रखें एवं उन कामिओ को दूर करने का सुझाव दे,उसके लिए संघर्ष करें उसे सही दिसा में ले जाएँ,उसमे सामिल स्वार्थी तत्वों कि पहचान करें एवं उनके स्वार्थ को नंगा करे.
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