chankya
RANJIT KUMAR (KUMAR SANKALP) P-171,CIT ROAD, KAKURGACHI,KOL-54 MOB NO. 09883220560
Wednesday, June 22, 2011
short question for BA 1st year
1 . 'प्रयोग दोहरा साधन है' -- कैसे?
2 . छायावादी वैयक्तिकता और प्रयोगवादी वैयक्तिकता में क्या अंतर है?
3 . भक्तिकालीन श्रृंगार और रीतिकालीन श्रृंगार में अंतर बतावें?
४. प्रगति-प्रयोग में अंतर स्पष्ट करें?
५.
objectives question for BA 3rd year
नाटक
1 . 'रंगमंच' को 'चाक्षुस यज्ञ' कौन कहते थे?
2 . नाटक को 'पंचम वेद' किसने कहा?
3 . 'अभिज्ञान शाकुंतलम' किसका नाटक है?
4 . शूद्रक किस भाषा के नाटककार हैं?
5 . 'तमासा' कहाँ का प्रसिद्द लोकनाट्य है?
6 . विजय तेंदुलकर किस भाषा के नाटककार है?
7 . नौटंकी कहाँ का लोकनाट्य है?
8 . नौटंकी का सबसे प्रसिद्द छंद क्या है?
9 . नाटक में रंगा किसे कहा जाता है?
10 . 'बकरी' किसका नाटक है?
11 . 'इन्दरसभा' किसका नाटक है?
12 . बंगाल के प्रसिद्द लोकनाट्य का क्या नाम है?
13 . पारसी रंगमंच से जुड़े दो नाटककारों का नाम बताइए?
14 . 'बेताब' किस नाटककार का उपनाम है?
15 . 'बिल्व-मंगल उर्फ़ भक्त सूरदास' किसका नाटक है?
16. 'आगरा बाज़ार' किसका नाटक है?
17 . 'अंधेर नगरी' का प्रकाशन वर्ष?
18 . भारतेंदु को 'बदरंग दृश्य के बेहद जिंदादिल नाटककार' किसने कहा है?
19 . पारसी नाट्य-लेखन और उनका रंगमंच-प्रदर्शन सबसे अधिक किस भाषा में
हुआ है?
20 . 'बेताब' के दो नाटकों का नाम बताइए?
21 . 'विदेसिया' कहाँ का लोकनाट्य है?
22 . 'विदेसिया' के प्रवर्तक कौन थे?
23 . 'भांड' कहाँ का लोकनाट्य है?
24 . 'कुचिपुड़ी' कहाँ का लोकनाट्य है?
25 . 'हाथरसी' नौटंकी का सम्बन्ध किस राज्य से है?
26 . आगा हश्र के दो नाटकों का नाम बताइए?
27 . 'बहुरुपिया' कहाँ का लोकनाटक है?
28 .
उत्तर ---- 1 . कालिदास 2 . भरत मुनि 3 . कालिदास 4 . संस्कृत 5 . महाराष्ट्र 6 . मराठी 7 . उत्तर प्रदेश 8 . चौबोला 9 . विदूषक को 10 . सर्वेश्वर 11 . अमानत अली 12 . जात्रा 13 . आगा हश्र कश्मीरी, मु० अनवर हुसैन 'आरजू', मुंशी मेहंदी हसन 'अहसान', नसरवानजी खान साहब 'आराम' 14 . नारायण प्रसाद 'बेताब' 15 . आगा हश्र कश्मीरी 16 . हबीब तनवीर 17 . 1881 18. गिरीश रस्तोगी 19 . हिंदी 20 . महाभारत , रामायण 21 . बिहार 22 . भिखारी ठाकुर 23 . कश्मीर 24 . आंध्र प्रदेश 25 . उत्तर प्रदेश 26 . 'आँख का नशा' , 'रुस्तम सोहराब' 27 . महाराष्ट्र 28 .
''साथी हाथ बढ़ाना
प्रकृति को है बचाना. ''
पेड़ लगायें ,प्रकृति को स्वच्छ बनायें.
इस कम में साथी अपना हाथ बढ़ाएं.
'चिपको आन्दोलन' देशभर में फैला है.
फिर प्राकृतिक वातावरण क्यों इतना मैला है?
साथी हाथ बढ़ाना होगा.
प्रकृति को बचाना होगा.
प्रकृति में जब शुद्ध हवा नहीं रह जाएगा.
अभागा मानव फिर साँस लेने कहाँ जाएगा.
प्रकृति के श्रृंगार पेड़- पौधे जब न रहने पाएँगे.
फिर मानव जीवन को स्वस्थ कैसे बनाएँगे.
प्रकृति की हरियाली जब नष्ट हो जाएगी.
मानव जीवन की सुषमा भी विनष्ट हो जाएगी.
धरती का तापमान दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जाता है.
फिर इन्सान इसका राज क्यों समझ न पता है.
विज्ञानं उपभोगी अंध मानव को प्रकृति प्रकोप झेलना होगा.
अब न संभला तो महा प्रलय का कोप भी इसको झेलना होगा .
मानव के प्रकृति विजय-अभियान को,
थी चेतावनी भयंकर सुनामी जापान की.
अगर नहीं रुका अभिमानी मानव तो,
प्रकृति लेगी बदला निज अपमान की.
''साथी हाथ बढ़ाना
प्रकृति को है बचाना. ''
Monday, June 6, 2011
रामदेव का अनशन
रामदेव जी काले धन एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन कर रहे हैं.इस आन्दोलन को लेकर तरह तरह की बातें की जा रही हैं.खाशकर इस देश के बुद्धिजीवियों की यह बड़ी आदत है कि वे खुद तो जमीनी लड़ाई कि बात नहीं छेड़ते,मगर यदि कोई करता है तो उसमे पचासों नुकश निकल्रे हैं .न खुद कुछ करते हैं न किसी को करने देतें हैं.आजकल तो इनके हाथ फसबूक का सस्ता माध्यम मिल गया ह,लगातार हर अच्छे-बुरा कम पर अपनी बुद्धुजिविपन झड लेट हैं.क्या बुद्धिजीवियों का ऍम एकमात्र यही दायित्व रह गया है?रामदेव का आन्दोलन हो सकता है कि किसी स्वार्थ से जुदा हो,मगर जनता कि उसमे हिस्सेदारी का जनता को क्या लाभ?जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ और काले धन के खिलाफ आन्दोलन चाहती है.वह किसी रामदेव या कृषणदेव के सपोर्ट में कड़ी नहीं है.देश कि संसद पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुकी है.नेतागण यह नहीं चाहते हैं कि देश से भ्रष्टाचार ख़त्म हो. इससे उनकी शक्ति कमजोर होगी .हमें केवल यह सोचना है कि हमें न तो किसी रामदेव का सुपोर्ट करना है न किसी का हमें केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना है.ऐसा नहीं है कि कोई रामदेव या कृष्णदेव करोड़ों जनता को उल्लू बनाकर अपना कम निकल लेगा.उल्लू तो नेता व् बना रहे हैं और हमें जब उल्लू ही बनाना है तो कोई अच्छे कम के लिए बना रहा है तो उसीसे बने.लालू खुद करोड़ों के चारा घोटाला में लिप्त थे,उनको क्या अधिकार है कि वह रामदेव के आन्दोलन को गलत थाराए,उनके जैसा भ्रष्ट लोग तो दर कर तरह तरह कि अफवाहें फैलायेंगे.संसद कि सुपेर्मेशी नेतागण चाहते है?क्या भ्रश नेताओं को सुपर्मेशी के नाम पर खुलेआम भ्रष्टाचार करने ,देश को लुटने का वैधानिक अधिकार मिल गया है या दिया जाना चाहिए .संसद कि सुपर्मेशी ऐसे ही ब्रश नेताओ के चलते ख़त्म करने की जरुरत है.sathi gaw chalen
Friday, May 6, 2011
कलमाड़ी चालीसा
श्री गुरू भ्रष्ट रज ,निज मन मुकुर सिधार
बरनौं राजनीती विमल जस जो दायक फल चार
भ्रष्टहीन तनु जनि के सुमिरौं भ्रष्ट कुमार
भ्रष्ट बुद्धि-ज्ञान देहूं मोहि, हरहूँ क्लेश विकार
जय कलमाड़ी भ्रष्ट गुण सागर
तू भ्रष्टटीश(भ्रष्टाचारियों का स्वामी) तिहूँ लोक उजागर
कांग्रेस दूत अतुलित चलबाजा
दुनिया में बजाया भ्रष्टाचार का बाजा
महाभ्रष्ट चालबाज़ भ्रष्टंगी
सुमति निवारो कुमति के संगी
कला वरन विराज कुवेशा
मन काला अच्छाई को न लेशा
हाथे कामन वेल्थ खेल का झंडा विराजा
घर से बैंक तक काला धन साजा
................
जय जय जय कलमाड़ी गोसाईं
कृपा करहूँ इस देश की नाईं
जो शत बार पथ कराइ कोई
होही महाभ्रष्ट जाई जेल में सोई
Monday, April 25, 2011
बात एकदम सही है.सत्य साईं की जीवनी पर प्रकाश न डालकर उन्हें भगवान बताया जा रहा है.उनके 5 चमत्कारों के बल पर मीडिया का झूठ तंत्र और पूंजिपत्तियों का अन्धविश्वास तंत्र उन्हें राम और कृष्ण के समकक्ष खड़ा कर दिया है.हलाकि साईं की सारी भविष्यवानियाँ झूठी साबित हो चुकी हैं.उन्होंने अपने मरने का साल 2022 घोषित की थी,मगर 11 साल पहले ही चल बसे .फिर भी अन्धविश्वास -तंत्र उनको भगवान साबित कर रहा है.सचिन का वर्ल्ड-कप में कैसा प्रदर्शन रहा ,यह किसी से छुपा नहीं है. क्या सचिन को वर्ल्ड-कप फ़ाइनल में बहुत खराब खेलने का कोई अफ़सोस नहीं? क्या उनके साईं ने उनका उस समय कोई हेल्प नहीं किया?वर्ल्ड- कप हमने जिन खेलाडीओं के बेहतर प्रदर्शन के बदौलत जीते उनका कोई गुणगान नहीं.क्या सचिन सचमुच भगवान हैं?दूसरी बात अगर साईं भगवान हैं तो उन्हें बचाने के लिए साधारण डॉक्टर इतना प्रयास क्यों कर रहें हैं?भगवान तो दूसरो को बचाता है,यहाँ भगवान को ही बचाने के लिए लाखो -करोडो खर्च किया जा रहा है.40 हज़ार करोड़ की संपत्ति का कोई लेखा -जोखा नहीं रखा जाएगा ,क्योंकि वह भगवान की संपत्ति है.बड़े -बड़े आई ०एस अधिकारी अपनी नौकरी छोड़कर साईं की सेवा में भागे.समाज सेवा से बढ़कर साईं -सेवा.जो रहीम दीनही लखै सो दीनबंधु सम होय,सब झूठ.जांच होनी चाहिए कि ये अधिकारी कही अपने काले धन को छिपाने के लिए तो भगवान की सरन में नहीं गये?साईं के देश में 85 करोड़ जनता दो जून की रोटी के लिए बेहाल है.इनकी आमदनी 20 रूपये प्रतिदिन है. देश भ्रष्टाचार के सबसे भयानक दौर से गुजर रहा है.साईं अगर भगवान हैं तो इनमें से एक भी समस्या क्यों दूर नहीं कर पाए.महंगाई के चलते लाखो लोगों ने आत्महत्या की .साईं ने उनके लिए कुछ क्यों नही किया?हजारो महिलाओं ,यहाँ तक कि मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार होता है.साईं ने इनमे से किसी के खिलाफ आवाज़ क्यों नहीं उठाई,जबकि उनके पास अपर जनता का समर्थन था.एक अन्ना जब भ्रष्टाचार के मुहीम में पुरे देश को एक कर सकते हैं तो फिर साईं तो भगवान थे.वे तो अपने आह्वान से भ्रष्टाचार के किलाफ़ मुकम्मल लड़ाई लड़ सकते थे.मगर चुपी क्यों?बाबा रामदेव के पास भी ट्रस्ट है,मगर वे भगवान बनाने का दावा नहीं करते ,अपनी समझ में देश सेवा एवं समाज सेवा कर रहे है और बेहतर काम कर रहे हैं.साईं अपने को सिर्डिः के साईं का अवतार बताते हैं,मगर दोनों के जीवन चरित एकदम विपरीत है.साईं ने अपने ट्रस्ट के माध्यम से जो समाज सेवा की वह ठीक है,मगर यह देखा जाना चाहिए कि इतना पैसा किस रास्ता से आया?उसका प्रोफिट कहाँ जाता है?क्या साईं इस पैसे का उपयोग गरीब जनता की समस्याओ को दूर करने के लिए नहीं कर सकते थे अगर किया और भगवान होकर किया तो फिर देश में गरीबी क्यों बढाती गयी?मन्हान्गाई क्यों बढती गयी?लोग और गरीब क्यों होते गये?गरीब की किसी समस्या का निदान क्यों नहीं हुआ?उअसे अमीरों को ही केवल लाभ क्यों होता गया और हो रहा है?अमीर और अमीर और गरीब और गरीब क्यों होते गये?ये सरे सवाल साईं या तथाकथित भगवान को अगर बेचैन नही करते थे तो क्यों नहीं करते यहे?साईं एक महँ इन्सान हो सकते थे अगर अपने समाज सेवा के लक्ष्य को लेकर चलते.
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