''साथी हाथ बढ़ाना
प्रकृति को है बचाना. ''
पेड़ लगायें ,प्रकृति को स्वच्छ बनायें.
इस कम में साथी अपना हाथ बढ़ाएं.
'चिपको आन्दोलन' देशभर में फैला है.
फिर प्राकृतिक वातावरण क्यों इतना मैला है?
साथी हाथ बढ़ाना होगा.
प्रकृति को बचाना होगा.
प्रकृति में जब शुद्ध हवा नहीं रह जाएगा.
अभागा मानव फिर साँस लेने कहाँ जाएगा.
प्रकृति के श्रृंगार पेड़- पौधे जब न रहने पाएँगे.
फिर मानव जीवन को स्वस्थ कैसे बनाएँगे.
प्रकृति की हरियाली जब नष्ट हो जाएगी.
मानव जीवन की सुषमा भी विनष्ट हो जाएगी.
धरती का तापमान दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जाता है.
फिर इन्सान इसका राज क्यों समझ न पता है.
विज्ञानं उपभोगी अंध मानव को प्रकृति प्रकोप झेलना होगा.
अब न संभला तो महा प्रलय का कोप भी इसको झेलना होगा .
मानव के प्रकृति विजय-अभियान को,
थी चेतावनी भयंकर सुनामी जापान की.
अगर नहीं रुका अभिमानी मानव तो,
प्रकृति लेगी बदला निज अपमान की.
''साथी हाथ बढ़ाना
प्रकृति को है बचाना. ''
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