Monday, June 6, 2011

रामदेव का अनशन

रामदेव जी काले धन एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन कर रहे हैं.इस आन्दोलन को लेकर तरह तरह की बातें की जा रही हैं.खाशकर इस देश के बुद्धिजीवियों की यह बड़ी आदत है कि वे खुद तो जमीनी लड़ाई कि बात नहीं छेड़ते,मगर यदि कोई करता है तो उसमे पचासों नुकश निकल्रे हैं .न खुद कुछ करते हैं न किसी को करने देतें हैं.आजकल तो इनके हाथ फसबूक का सस्ता माध्यम मिल गया ह,लगातार हर अच्छे-बुरा कम पर अपनी बुद्धुजिविपन झड लेट हैं.क्या बुद्धिजीवियों का ऍम एकमात्र यही दायित्व रह गया है?रामदेव का आन्दोलन हो सकता है कि किसी स्वार्थ से जुदा हो,मगर जनता कि उसमे हिस्सेदारी का जनता को क्या लाभ?जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ और काले धन के खिलाफ आन्दोलन चाहती है.वह किसी रामदेव या कृषणदेव के सपोर्ट में कड़ी नहीं है.देश कि संसद पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुकी है.नेतागण यह नहीं चाहते हैं कि देश से भ्रष्टाचार ख़त्म हो. इससे उनकी शक्ति कमजोर होगी .हमें केवल यह सोचना है कि हमें न तो किसी रामदेव का सुपोर्ट करना है न किसी का हमें केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना है.ऐसा नहीं है कि कोई रामदेव या कृष्णदेव करोड़ों जनता को उल्लू बनाकर अपना कम निकल लेगा.उल्लू तो नेता व् बना रहे हैं और हमें जब उल्लू ही बनाना है तो कोई अच्छे कम के लिए बना रहा है तो उसीसे बने.लालू खुद करोड़ों के चारा घोटाला में लिप्त थे,उनको क्या अधिकार है कि वह रामदेव के आन्दोलन को गलत थाराए,उनके जैसा भ्रष्ट लोग तो दर कर तरह तरह कि अफवाहें फैलायेंगे.संसद कि सुपेर्मेशी नेतागण चाहते है?क्या भ्रश नेताओं को सुपर्मेशी के नाम पर खुलेआम भ्रष्टाचार करने ,देश को लुटने का वैधानिक अधिकार मिल गया है या दिया जाना चाहिए .संसद कि सुपर्मेशी ऐसे ही ब्रश नेताओ के चलते ख़त्म करने की जरुरत है.sathi gaw chalen

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