Wednesday, June 22, 2011
short question for BA 1st year
1 . 'प्रयोग दोहरा साधन है' -- कैसे?
2 . छायावादी वैयक्तिकता और प्रयोगवादी वैयक्तिकता में क्या अंतर है?
3 . भक्तिकालीन श्रृंगार और रीतिकालीन श्रृंगार में अंतर बतावें?
४. प्रगति-प्रयोग में अंतर स्पष्ट करें?
५.
objectives question for BA 3rd year
नाटक
1 . 'रंगमंच' को 'चाक्षुस यज्ञ' कौन कहते थे?
2 . नाटक को 'पंचम वेद' किसने कहा?
3 . 'अभिज्ञान शाकुंतलम' किसका नाटक है?
4 . शूद्रक किस भाषा के नाटककार हैं?
5 . 'तमासा' कहाँ का प्रसिद्द लोकनाट्य है?
6 . विजय तेंदुलकर किस भाषा के नाटककार है?
7 . नौटंकी कहाँ का लोकनाट्य है?
8 . नौटंकी का सबसे प्रसिद्द छंद क्या है?
9 . नाटक में रंगा किसे कहा जाता है?
10 . 'बकरी' किसका नाटक है?
11 . 'इन्दरसभा' किसका नाटक है?
12 . बंगाल के प्रसिद्द लोकनाट्य का क्या नाम है?
13 . पारसी रंगमंच से जुड़े दो नाटककारों का नाम बताइए?
14 . 'बेताब' किस नाटककार का उपनाम है?
15 . 'बिल्व-मंगल उर्फ़ भक्त सूरदास' किसका नाटक है?
16. 'आगरा बाज़ार' किसका नाटक है?
17 . 'अंधेर नगरी' का प्रकाशन वर्ष?
18 . भारतेंदु को 'बदरंग दृश्य के बेहद जिंदादिल नाटककार' किसने कहा है?
19 . पारसी नाट्य-लेखन और उनका रंगमंच-प्रदर्शन सबसे अधिक किस भाषा में
हुआ है?
20 . 'बेताब' के दो नाटकों का नाम बताइए?
21 . 'विदेसिया' कहाँ का लोकनाट्य है?
22 . 'विदेसिया' के प्रवर्तक कौन थे?
23 . 'भांड' कहाँ का लोकनाट्य है?
24 . 'कुचिपुड़ी' कहाँ का लोकनाट्य है?
25 . 'हाथरसी' नौटंकी का सम्बन्ध किस राज्य से है?
26 . आगा हश्र के दो नाटकों का नाम बताइए?
27 . 'बहुरुपिया' कहाँ का लोकनाटक है?
28 .
उत्तर ---- 1 . कालिदास 2 . भरत मुनि 3 . कालिदास 4 . संस्कृत 5 . महाराष्ट्र 6 . मराठी 7 . उत्तर प्रदेश 8 . चौबोला 9 . विदूषक को 10 . सर्वेश्वर 11 . अमानत अली 12 . जात्रा 13 . आगा हश्र कश्मीरी, मु० अनवर हुसैन 'आरजू', मुंशी मेहंदी हसन 'अहसान', नसरवानजी खान साहब 'आराम' 14 . नारायण प्रसाद 'बेताब' 15 . आगा हश्र कश्मीरी 16 . हबीब तनवीर 17 . 1881 18. गिरीश रस्तोगी 19 . हिंदी 20 . महाभारत , रामायण 21 . बिहार 22 . भिखारी ठाकुर 23 . कश्मीर 24 . आंध्र प्रदेश 25 . उत्तर प्रदेश 26 . 'आँख का नशा' , 'रुस्तम सोहराब' 27 . महाराष्ट्र 28 .
''साथी हाथ बढ़ाना
प्रकृति को है बचाना. ''
पेड़ लगायें ,प्रकृति को स्वच्छ बनायें.
इस कम में साथी अपना हाथ बढ़ाएं.
'चिपको आन्दोलन' देशभर में फैला है.
फिर प्राकृतिक वातावरण क्यों इतना मैला है?
साथी हाथ बढ़ाना होगा.
प्रकृति को बचाना होगा.
प्रकृति में जब शुद्ध हवा नहीं रह जाएगा.
अभागा मानव फिर साँस लेने कहाँ जाएगा.
प्रकृति के श्रृंगार पेड़- पौधे जब न रहने पाएँगे.
फिर मानव जीवन को स्वस्थ कैसे बनाएँगे.
प्रकृति की हरियाली जब नष्ट हो जाएगी.
मानव जीवन की सुषमा भी विनष्ट हो जाएगी.
धरती का तापमान दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जाता है.
फिर इन्सान इसका राज क्यों समझ न पता है.
विज्ञानं उपभोगी अंध मानव को प्रकृति प्रकोप झेलना होगा.
अब न संभला तो महा प्रलय का कोप भी इसको झेलना होगा .
मानव के प्रकृति विजय-अभियान को,
थी चेतावनी भयंकर सुनामी जापान की.
अगर नहीं रुका अभिमानी मानव तो,
प्रकृति लेगी बदला निज अपमान की.
''साथी हाथ बढ़ाना
प्रकृति को है बचाना. ''
Monday, June 6, 2011
रामदेव का अनशन
रामदेव जी काले धन एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन कर रहे हैं.इस आन्दोलन को लेकर तरह तरह की बातें की जा रही हैं.खाशकर इस देश के बुद्धिजीवियों की यह बड़ी आदत है कि वे खुद तो जमीनी लड़ाई कि बात नहीं छेड़ते,मगर यदि कोई करता है तो उसमे पचासों नुकश निकल्रे हैं .न खुद कुछ करते हैं न किसी को करने देतें हैं.आजकल तो इनके हाथ फसबूक का सस्ता माध्यम मिल गया ह,लगातार हर अच्छे-बुरा कम पर अपनी बुद्धुजिविपन झड लेट हैं.क्या बुद्धिजीवियों का ऍम एकमात्र यही दायित्व रह गया है?रामदेव का आन्दोलन हो सकता है कि किसी स्वार्थ से जुदा हो,मगर जनता कि उसमे हिस्सेदारी का जनता को क्या लाभ?जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ और काले धन के खिलाफ आन्दोलन चाहती है.वह किसी रामदेव या कृषणदेव के सपोर्ट में कड़ी नहीं है.देश कि संसद पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुकी है.नेतागण यह नहीं चाहते हैं कि देश से भ्रष्टाचार ख़त्म हो. इससे उनकी शक्ति कमजोर होगी .हमें केवल यह सोचना है कि हमें न तो किसी रामदेव का सुपोर्ट करना है न किसी का हमें केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना है.ऐसा नहीं है कि कोई रामदेव या कृष्णदेव करोड़ों जनता को उल्लू बनाकर अपना कम निकल लेगा.उल्लू तो नेता व् बना रहे हैं और हमें जब उल्लू ही बनाना है तो कोई अच्छे कम के लिए बना रहा है तो उसीसे बने.लालू खुद करोड़ों के चारा घोटाला में लिप्त थे,उनको क्या अधिकार है कि वह रामदेव के आन्दोलन को गलत थाराए,उनके जैसा भ्रष्ट लोग तो दर कर तरह तरह कि अफवाहें फैलायेंगे.संसद कि सुपेर्मेशी नेतागण चाहते है?क्या भ्रश नेताओं को सुपर्मेशी के नाम पर खुलेआम भ्रष्टाचार करने ,देश को लुटने का वैधानिक अधिकार मिल गया है या दिया जाना चाहिए .संसद कि सुपर्मेशी ऐसे ही ब्रश नेताओ के चलते ख़त्म करने की जरुरत है.sathi gaw chalen
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